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Thursday, January 15, 2026

मौत के बाद कार्रवाई: हकीमी अस्पताल का लाइसेंस निरस्त, परिजनों के आंदोलन पर प्रशासन सख्त

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बुरहानपुर। लालबाग रोड स्थित हकीमी अस्पताल में गर्भवती महिला की मौत के बाद उठे जनआक्रोश और लगातार विरोध प्रदर्शन के बीच प्रशासन ने निर्णायक कदम उठाते हुए अस्पताल का नर्सिंग होम पंजीयन और लाइसेंस निरस्त कर दिया है। यह आदेश शुक्रवार देर शाम स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी किया गया, जिसके बाद अस्पताल प्रबंधन में हड़कंप जैसा माहौल है।

गौरतलब है कि 11 नवंबर को जैनाबाद निवासी 26 वर्षीय वैष्णवी नागेश चौहान की प्रसव के दौरान मौत हो गई थी। परिजनों का आरोप था कि अस्पताल में समय पर डॉक्टर उपलब्ध नहीं थे और लापरवाही के कारण वैष्णवी की जान गई। इस घटना के बाद परिवारजन और स्थानीय लोग गुस्से में आ गए और सोमवार से शनवारा चौक पर अनिश्चितकालीन क्रमिक भूख हड़ताल शुरू कर दी।

विरोध धीरे-धीरे बड़ा रूप लेता गया और कई सामाजिक संगठन भी समर्थन में उतर आए। शुक्रवार दोपहर आंदोलन स्थल पर पहुंचे सांसद ज्ञानेश्वर पटेल ने परिजनों से चर्चा की और मामले में कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके कुछ ही घंटे बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल लाइसेंस निरस्त करने का आदेश जारी कर दिया।

जांच समिति की रिपोर्ट में सामने आया कि अस्पताल में मूलभूत सुविधाओं और अनिवार्य संसाधनों का गंभीर अभाव था। साथ ही अस्पताल संचालन नियमों का उल्लंघन पाया गया। जांच में यह तथ्य भी उजागर हुआ कि सरकारी सेवा में कार्यरत एक स्त्री रोग विशेषज्ञ निजी अस्पताल में ऑपरेशन कर रही थीं, जो मध्य प्रदेश स्वास्थ्य सेवा नियमों के विरुद्ध है। अस्पताल में योग्य स्टाफ की कमी और आपातकालीन चिकित्सा प्रबंधन की व्यवस्था भी असंतोषजनक पाई गई।

इन तमाम अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने मध्य प्रदेश उपचयर गृह एवं पंजीयन अधिनियम 1973 के तहत अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई की। आदेश के लागू होते ही अस्पताल में उपचार और सेवाएं तत्काल प्रभाव से बंद कर दी गईं।

उधर, मृतका के पति और परिवारजन ने इसे न्याय के लिए शुरुआती कदम बताते हुए कहा कि जब तक दोषियों पर आपराधिक मामला दर्ज नहीं होता और गिरफ्तारी नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक परिवार की लड़ाई नहीं, बल्कि शहर में निजी अस्पतालों की मनमानी और लापरवाही के खिलाफ आवाज है।

  1. शहर में इस घटना के बाद निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और शासन की निगरानी पर सवाल उठने लगे हैं। लोग पूछ रहे हैं—“अगर निगरानी पहले होती, तो क्या वैष्णवी आज जिंदा होती?”

फिलहाल घटना ने प्रशासन, स्वास्थ्य व्यवस्था और निजी चिकित्सा संस्थानों की जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। मामला अब कानूनी दिशा में आगे बढ़ रहा है और अगली कार्रवाई पर सभी की नज़रें टिकी हैं।

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