हरदा। शहर के मरकज़-ए-अहले सुन्नत दारुल उलूम नूरी में जलसा-ए-दस्तरबंदी व जश्न-ए-अबू बकर सिद्दीकी रज़ियल्लाहु अन्हु का भव्य और रूहानी आयोजन किया गया। कार्यक्रम दारुल उलूम नूरी, हरदा परिसर में अकीदत और एहतराम के साथ संपन्न हुआ, जिसमें मदरसे से अपनी दीनी तालीम पूरी कर चुके तलबा के सरों पर फ़ाज़िलते दस्तार रखी गई और उन्हें सर्टिफिकेट प्रदान कर हाफ़िज़ की उपाधि से नवाज़ा गया।
इस मौके पर इंदौर से तशरीफ़ लाए खलीफ़ा-ए-हज़रत ताजुश्शरिया, मुफ्ती अनवार हुसैन कादरी मिस्बाही साहब ने ख़ास बयान फरमाया। उन्होंने कुरआन-ए-पाक की तालीम, हिफ़्ज़-ए-कुरआन की फ़ज़ीलत और दीनी तालीम के ज़रिये समाज में सुधार की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उनके बयान को सुनने के लिए बड़ी संख्या में उलेमा-ए-किराम, हाफ़िज़, तलबा और आमजन मौजूद रहे।
कार्यक्रम के मेहमान-ए-ख़ुसूसी अनवार अहमद कादरी साहब रहे। जलसे की सरपरस्ती दारुल उलूम नूरी मरकज़-ए-अहले सुन्नत के सदर मुदर्रिस बाबा सैय्यद नजाकत अली साहब ने की। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि दीनी तालीम केवल इबादत तक सीमित नहीं है, बल्कि वह इंसान के अख़लाक़, किरदार और समाज के प्रति ज़िम्मेदारी को भी मज़बूत करती है। उन्होंने तलबा को इल्म के साथ अमल को अपनाने की नसीहत दी।
कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बानी-ए-दारुल उलूम नूरी, खलीफ़ा-ए-बाबा नूरी अल्हाज सलीम नूरी साहब ने बताया कि इस वर्ष मदरसे के चार हाफ़िज़ों के सर पर दस्तरबंदी की गई। उन्होंने कहा कि दारुल उलूम नूरी वर्षों से दीनी तालीम के साथ-साथ अमन, भाईचारे और सुन्नियत की तालीमात को आम करने का कार्य कर रहा है।
मदरसे के मौलाना हज़रत मिन्हाजुल कादरी साहब ने बताया कि यह दारुल उलूम नूरी का 12वां सालाना जलसा था। कार्यक्रम में अनवार अहमद कादरी साहब ने पैग़म्बर-ए-इस्लाम हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के जांनिसार साहाबी, यार-ए-गार हज़रत अबू बकर सिद्दीकी रज़ियल्लाहु अन्हु की सवाने हयात और उनकी तालीमात पर विस्तार से रोशनी डाली। उन्होंने हज़रत अबू बकर सिद्दीकी रअ. की सादगी, क़ुर्बानी, ईमानदारी और इस्लाम के लिए की गई ख़िदमात को आज की पीढ़ी के लिए मिसाल बताया।
जलसे के अंत में देश, प्रदेश और समाज में अमन-ओ-अमान, भाईचारे और खुशहाली के लिए विशेष दुआ की गई। कार्यक्रम में हरदा सहित आसपास के क्षेत्रों से आए उलेमा, समाजसेवी और बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।


