कभी घरों की चौखट और आंगन की शोभा मानी जाने वाली गौ माता अब सड़कों पर भटक रही हैं… और कुत्ते, जो कभी गलियों में दिखते थे, अब बिस्तरों तक पहुंच गए हैं। यह हालात समाज की सोच और व्यवस्था दोनों पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
हरदा हरदा पहुंचे पूर्व राज्य मंत्री कंप्यूटर बाबा ने घंटाघर पर इस मुद्दे को लेकर सरकार को चेतावनी दी है। उनका कहना है कि गौ माता को सड़कों पर बेसहारा छोड़ना न केवल परंपरा और आस्था पर आघात है, बल्कि प्रशासन की बड़ी लापरवाही का प्रमाण भी है।
कंप्यूटर बाबा ने साफ शब्दों में कहा— अगर जल्द ही गौ माता की उचित देखभाल और संरक्षण की ठोस व्यवस्था नहीं की गई, तो सरकार को कड़ा विरोध झेलना पड़ेगा।
कंप्यूटर बाबा ने इस दौरान प्रदेश सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जिस सरकार ने गौमाता के नाम पर वोट मांगे, वही आज गायों को भूखा–प्यासा और बेसहारा छोड़ चुकी है। गौशालाओं की बदहाल हालत, सड़कों पर भटकती और हादसों में मरती गायें… यह सब सरकार की नाकामी की गवाही है। अगर प्रदेश सरकार गौमाता की दुर्दशा की और ध्यान नहीं देती है तो जल्दी हम हजारों गौमाताओं और गौ सेवकों के साथ भोपाल पहुंचेंगे।
अब देखने वाली बात होगी कि सरकार इस चेतावनी को कितनी गंभीरता से लेती है और क्या वाकई सड़कों से गौ माता को आंगन तक, और बिस्तरों से कुत्तों को बाहर निकालने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
आज प्रदेश में गायों की हालत कुत्तों से भी बदत्तर हो गई है… कुत्ते तो घर–घर पहुंच गए, लेकिन गौमाता सड़कों पर मरने को मजबूर हैं। सरकार सिर्फ नारों में गाय माता की बात करती है, जमीन पर कुछ नहीं। बाबा ने साफ चेतावनी दी है कि अगर जल्द ठोस कदम नहीं उठे तो यह मुहिम राज्यव्यापी आंदोलन का रूप लेगी। वहीं जनता से उन्होंने अपील की कि राजनीति से ऊपर उठकर सीधे सहयोग दें।




